Tभाकृअनुप-राष्ट्रीरय कृषि कीट संसाधन ब्यूोरो ने दिनांक 19 अक्तूाबर 2019 को कर्नाटक पशुचिकित्साञ परिषद सभागार में अपने 26वें स्थाोपना दिवस का आयोजन किया।
मुख्यव अतिथि, डॉ. अशोक दलवाई, आईएएस, सीईओ, राष्ट्री य बारानी क्षेत्र प्राधिकरण, कृषि और किसान कल्याअण मंत्रालय, भारत सरकार ने संस्थाआन के कार्यकरण की प्रशंसा की और संस्थाान को सौंपे गए कार्य को निष्पानदित करने का श्रेय उन्हों ने भाकृअनुप-रा.कृ.की.सं. ब्यूररो के स्टानफ सदस्योंे की सहक्रियावादी प्रकृति को दिया। उन्होंयने साफ-सफाई के आधार पर, संस्थाान में स्वसच्छपता का उल्लेहख करते हुए कहा कि संस्थाान ने स्वीच्छन भारत मिशन के उद्देश्य को साकार कर दिखाया है। कार्यनिष्पाएदन के संबंध में, उन्होंधने संस्थान में अनुरक्षित कीट रिपोजिटरी और किसानों की आवश्यककता की पूर्ति के लिए कीट व्युत्पाबदित संसाधनों के उपयोग के आधार पर, संस्थाखन की क्षमता की प्रशंसा की। अपने संबोधन में, उन्होंधने इस बात पर भी जोर दिया कि अनुसंधान उन समस्याओं पर केंद्रित किया जाना चाहिए जो किसानों की आय को बाधित करती हैं। उन्होंाने खाद्य सुरक्षा हासिल करने में कृषि वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना की, लेकिन उन्हों ने यह कहा कि आज पोषाहार सुरक्षा की ज्या्दा आवश्यरकता है। उन्हों ने वैज्ञानिकों से ऐसी प्रौद्योगिकियां विकसित करने का आग्रह किया जो पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाती हैं। उन्हों ने यह भी आग्रह किया कि स्थारयी नाशीजीव प्रबंधन समाधान विकसित किए जाएं, जो किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभप्रद हों।
डॉ. चाँदिश आर. बल्लाोल, निदेशक, भाकृअनुप-रा.कृ.की.सं. ब्यूबरो ने उप्स्थित लोगों को वर्ष 2019-20 के दौरान संस्था न की उपलब्धियों से अवगत कराया। निदेशक ने ब्यूदरो की सन् 1990 के दशक के दौरान प्रारंभिक पीडीबीसी के रूप में स्थारपना से लेकर रा.कृ.म.की.सं. (NBAII) एवं रा.कृ.की.सं. ब्यूारो (NBAIR) तक की यात्रा का वृतांत बताया। उन्हों ने ब्यूरो द्वारा वाणिज्यीककृत की गई विभिन्नी प्रौद्योगिकियों को रेखांकित किया। उन्होंरने हाल ही में रुगोस स्पाियरलिंग सफेद मक्खीि और फाल आर्मीवॉर्म नाशीजीवों का उदाहरण देते हुए अप्रत्यापशित आक्रामक नाशीजीवों से निपटने हेतु तैयारी की आवश्य कता पर जोर दिया। ब्यूतरो ने इन दोनों नाशीजीवों के प्रति बायोकंट्रोल आधारित प्रबंधन रणनीतियां विकसित करने पर अपना ध्याान आकृष्टज किया।







