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डॉ. पी. श्रीरामा कुमार

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दूरभाष सं.
080-2351-1982
फैक्‍स
080-2341-1961
व्‍यावसायिक अनुभव
16 वर्ष
एम.एससी., पीएच.डी. (कृषि कीटविज्ञान)
एम.एससी. (कृषि), पीएच.डी. (पादप विकृतिविज्ञान)
होमोप्‍टेरन नाशीजीवों के परभक्षियों के लिए बहु उत्‍पादन तकनीकों के विकास पर कार्यरत।
पादप विकृतिविज्ञान
प्रशिक्षण
पार्थेनियम वीड का जैविक नियंत्रण और प्रबंधन, सीएबीआई बायोसाइंस, यूके सेंटर (असकॉट), बर्कशायर, यूके (1998)।
पिकानिया माइक्रांथा का जैविक नियंत्रण और प्रबंधन, सीएबीआई बायोसाइंस, यूके सेंटर (असकॉट), बर्कशायर, यूके (2000)।
पुरस्‍कार और सम्‍मान
अम्बेसस्ड र, द् एसोसिएशन ऑफ एप्लासइड बायोलाजिस्ट्सक, वारविक, यूके (2008)।
आमंत्रित लेखक, कुटकियों और टिक्स के रोगों पर प्रायोगिक एवं अनुप्रयुक्तस बरूथिविज्ञान का विशेष अंक, स्प्रिंजर साइंस + बिजनेस मीडिया बी. वी., द् निदरलैंड्स (2008)।
इंडोमेंट अवार्ड, सोसाइटी फॉर इनवर्टिब्रेट पैथोलाजी, नॉक्सीविल, यूएसए (2007 से अब तक)।
आमंत्रित वार्ताकार, वर्कशॉप ऑन द् कोकोनट माइट, सलालह एग्रीकल्च7रल रिसर्च स्टेञशन, कृषि और मात्य्वारकी मंत्रालय, सल्टमनेट ऑफ ओमान (2007)।
आमंत्रित वार्ताकार, बारहवां अंतर्राष्ट्री य बरूथिविज्ञान सम्मे(लन, आम्स्टर्डम, आम्स।टर्डम, द् निदलैंड्स (2006)।
संक्षिप्‍त उपलब्धियां
भारत में आक्रमक खरपतवार, मिकानिया माइक्रांथा के क्लारसिकल जैविक नियंत्रण के लिए रतुआ कवक, पुकिनिया स्पेागाजीनी की परपोषी-विशिष्टजता आयातित, संगरोधित और स्था,पित की गई।
सीएबीआई बायोसाइंस, यूके के सहयोग से भारत में गंभीर खरपतवार, पार्थेनियुम हाइस्टे रोफोरस के लिए संभावित क्लागसिकल जैविक नियंत्रण अभिकारकों के रूप में दो रतुआ कवक, पुकिनिया अबरुप्टाि वैरा. पार्थेनिकोला एवं पी. मेलामपोडी की पहचान की।
साइपेरुस रोटुनडस, पार्थेनियम हाइस्टे रोफोरुस, ईकोरनिया क्रासिपेस एंव सालविनिया मोलेस्टा् के अनेक स्थाथनिक कवक रोगजनकों को विकसित किया गया और माइकोहर्बिसाइड के रूप में उनकी महत्ता स्थाथपित की।
नारियल ऐरियोफाइड माइट, ऐकिरिया गुरेरोनिस के विरूद्ध फील्डक में उपयोग के लिए एकारोपैथोजेनिक फंगस, र्हिसुटेला थॉम्सो के नी पर पूर्ण रूप से इंडियन माइकोआकारिसाइड (माइकोहिट) विकसित किया गया।
जैविक खरपतवार नियंत्रण में प्लांाट ग्रोथ-सुप्रेसिंग राइजोबैक्टीसरिया (पीजीएसआर) शब्दस इंट्रोड्यूस किया गया।
अभिज्ञान
अम्बेगस्ड र, द् एसोसिएशन ऑफ एप्ला-इड बायोलाजिस्ट्सस, वारविक, यूके (2008)।
आमंत्रित लेखक, कुटकियों और टिक्स के रोगों पर प्रायोगिक एवं अनुप्रयुक्ते बरूथिविज्ञान का विशेष अंक, स्प्रिंजर साइंस + बिजनेस मीडिया बी. वी., द् निदरलैंड्स (2008)।
इंडोमेंट अवार्ड, सोसाइटी फॉर इनवर्टिब्रेट पैथोलाजी, नॉक्सीविल, यूएसए (2007 से अब तक)।
आमंत्रित वार्ताकार, वर्कशॉप ऑन द् कोकोनट माइट, सलालह एग्रीकल्चुरल रिसर्च स्टे्शन, कृषि और मात्य्वारकी मंत्रालय, सल्टटनेट ऑफ ओमान (2007)।
आमंत्रित वार्ताकार, बारहवां अंतर्राष्ट्री य बरूथिविज्ञान सम्मे(लन, आम्स‍टर्डम, आम्स।टर्डम, द् निदलैंड्स (2006)।
प्रकाशन
100
चयनित प्रकाशन
श्रीराम कुमार, पी. और लीना सिंह। 2012. ए सिंपल मैथड ऑफ स्टो.रिंग नॉनसाइनेमेटअस एंड साइनेमेटअस आइसोलेट्स ऑफ हिर्सुटेला थॉम्प.सोनी व्हारइल कंजर्विंग देयर प्यू. 1)ओमोर्फिज्म., पैथोजेनेसिटी एंड जेनेटिक प्योुरिटी। फोलिया माइक्रोबायोलोजिका, 57 (1) : 15-19.
श्रीराम कुमार, पी. और लीना सिंह। 2009. लासियोडिप्लोडिया थियोब्रोमा इज ए माइकोपैरासाइट ऑफ ए पाउडरी मिल्डुयू पैथोजन। माइकोबायोलॉजी, 37 (4) : 308-309.
श्रीराम कुमार, पी. और लीना सिंह। 2008. इनेब्लिंग माइसेलियल एप्ली केशन ऑफ हिर्सुटेला थॉम्पासोनी फॉर मैनेजिंग द् कोकोनट माइट। एक्सकपेरिमेंटल एंड एप्लाइड एक्रोलॉजी, 46 : 169-182.
श्रीराम कुमार, पी. 2007. ए टेक्नी:क ट् स्ट्डी फंगल डिजीजिज इन एंड टू आयसोलेट द् कैजुअल ऑर्गेनिजम्स फ्रॉम असेरिया गुरेरोनिस, विद स्पे:शियल रेफरेंस टू हिर्सुटेला थॉम्पइसोनी इंफेक्श्न। सिस्टेिमेटिक एंड एप्लाइड एक्रोलोजी, 12 : 81-84.
श्रीराम कुमार, पी., रमानी, एस. और सिंह, एस. पी. 2005. नेचुरल सुप्रेशन ऑफ द् एक्वे टिक वीड साल्विनिया मोलेस्टा डी. एस. मिशेल, बाइ टू प्रिवियसली अनरिपोर्टड फंगल पैथोजन्सक। जर्नल ऑफ़ एक्वेटिक प्लांट मैनेजमेंट, 43 (2) : 105-106.
श्रीराम कुमार, पी. और अनुरूप, सी. पी. 2004. ए मैथड टू टेस्ट द् पैथोजेनेसिटी ऑफ फंगी टू ऐसेरिया गुरेरोनिस विद पार्टिकुलर रेफरेंस टू हिसुटेला थॉम्प4सोनी। सिस्टे मेटिक एंड एप्लाइड एक्रोलोजी, 9 : 11–14.