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डॉ. एन. बक्तडवत्स्लम

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Dr. N. Bakthavatsalam
ई-मेल
दूरभाष सं.
080-2351-1982 एक्सइटे. 323/ (Res.) 080-6450-1804
फैक्‍स
080-2341-1961
व्‍यावसायिक अनुभव
29 वर्ष
एम.एससी., पीएच.डी. (कृषि कीटविज्ञान)
एम.एससी., पीएच.डी.
होमोप्‍टेरन नाशीजीवों के परभक्षियों के लिए बहु उत्‍पादन तकनीकों के विकास पर कार्यरत।
वर्तमान में जिन विषयों पर कार्य किया जा रहा है, उनमें हैबिटेट मेनुपुलेशन तकनीकों के माध्याम से एंटोमोफेजिज का संरक्षण, एंटोमोफेजिज की दक्षता को बढ़ाने के लिए आकर्षक रासायनिकों की पहचान और उपयोग जैसे विषय हैं। आकर्षक रासायनिकों की दक्षता को बढ़ाने के लिए केमिकल मिमिक्सर का विकास।
प्रशिक्षण
राष्ट्री य जैव विज्ञान केंद्र, बेंगलुरु में ड्रोसोफिला मेलानोगेस्ट र के ओलफैक्टहरी रिसेप्टइरों पर एक वर्ष का पोस्ट् डाक्टोनरल प्रशिक्षण।
जीसीएमएस के उपयोग और अनुरक्षण पर सिंगापुर में हेवलेट पैकयार्ड सुविधा-केंद्र में प्रशिक्षण प्राप्तस किया।
पुरस्‍कार और सम्‍मान
कीटों के लिए सेमियोकेमिकल रिसर्च में परामर्शदाता के रूप में अभिज्ञानित।
मुख्य संपादक - सोसाइटी फॉर बायोकंट्रोल एडवांसमेंट।
संक्षिप्‍त उपलब्धियां
इलेक्ट्रो एंटेनोग्राम एवं बिहेवियरल परीक्षणों के माध्याम से हेलिकोवर्पा आर्मिजेरा की भिन्नस भौगोलिक समष्टियों के लिए Z-11-हेक्साेडेसिनल एवं Z9- हेक्सा डेसिनल के विभिन्नक मिश्रणों के उपयोग को सही साबित किया गया।
जब एकल ओडोरेंट मिश्रण की तुलना में बहु मिश्रणों को कीटों के समक्ष रखा गया तब कीटों की सहक्रियावादी गतिविधि प्रेक्षित की गई, क्योंककि कीटों ने मिश्रणों को भिन्नो कंपाउंडों के रूप में समझा, हालांकि विश्लेकषणात्मकक विधियों के माध्यशम से मिश्रणों में नए कंपाउंडों की पहचान करना संभव नहीं है।
क्राइसोपिड एवं ट्राइकोग्रामाटिड्स के लिए अट्रेक्टे न्ट्सय विकसित किए गए, जिनका उपयोग खेतों में रिइनफोर्सिंग एजेंट के रूप में किया जा सकता है।
कल्टीएवर्स, यानी एमसीयू-5 या एमसीयू-9 को, उनके अनुकूल रासायनिक एवं भौतिक गुणों के कारण एंटोमोफेजिज द्वारा काफी ज्याादा पसंद किया गया।
ट्राइट्रोफिक अन्योउन्यीक्रियाओं के माध्य म से प्राकृतिक शत्रु-कीटों का संरक्षण किया गया और सेमियोकेमिकलों के उपयोग को सही साबित किया गया।
अभिज्ञान
कीटों के लिए सेमियोकेमिकल अनुसंधान में परामर्शदाता के रूप में अभिज्ञानित।
प्रकाशन
60
चयनित प्रकाशन
बक्तलवत्संलम, एन. एवं टंडन, पी. एल. 2006. इनफ्लुवेंस ऑफ स्ट्रे न वेरिएशन एंड केयरोमोनल कंपाउंड्स ऑन द् पैरासिटिसाइजिंग एफिसियेंसी ऑफ ट्राइकोग्रामा चाइलोनिस, जर्नल ऑफ बायोलाजीकल कंट्रोल, 20 (1) : 13-18.
बक्तमवत्संलम, एन., टंडन, पी. एल. एवं बलाल, सी. आर. 2007. बिहेवियरल रिस्पों्सिस ऑफ कैम्पोलेटिस क्लोरिडिया (इचेन्यू)मोनिडा: हायमेनोप्टेरा) टू द् केयरोमोनल सबस्टांउसिस। जर्नल ऑफ एंटोमोलॉजिकल रिसर्च, 31 (3) : 217-223.
बक्तहवत्सलम, एन. एवं टंडन, पी. एल. 2006. केयरोमोन्स, देयर ऑप्टीएमम कंसन्ट्रेपशन्सस, एंड एप्लीाकेशन टेक्नीिक्सन टू इनहांस द् पैरासाइटिजेशन एफिसियेंसी ऑफ ट्राइकोग्रामा चाइलोनिस इशी (हाइमेनाप्टेेरा: ट्राइकोग्रामाटाइडा)। जर्नल ऑफ बायोलॉजिकल कंट्रोल। 20 (2) : 169-174.
बक्तनवत्स्लम, एन., टंडन, पी. एल., पाटिल, एस. बी., भेम्मांना हुगर एवं ए. होसामानी, ए. 2007. कैयरोमोन फॉम्यू्लेशन्सट एज रिइनफोर्सिंग एजेंट्स फॉर इनक्रीजिंग अबन्डें स ऑफ क्राइसोपर्ला कार्निया (स्टीयफंस) इन कॉटन इकोसिस्टसम। जे. बायोल. कंट्रोल, 21 (1) : 1-8.
बक्तइवत्सोलम, एन. एवं टंडन, पी एल। 2007. बिहेवियर एंड इलेक्ट्राइफिजियोलाजीकल रिस्पों सिस ऑफ क्राइस्पोरर्ला कार्नेया (स्टीफंस) टू केयरोमोन्स - एसिड हाइड्रोलाइज्डए/ ऑक्सी्डाइज्डफ एल - ट्राइप्टो्फान एंड इट्स ब्रेकडाउन प्रोडक्ट्स । जर्नल ऑफ बायोलाजीकल कंट्रोल 21 (स्पे्शियल इश्यूप): 79-84.